मेरी आवाज़ – Poem By Prakam Singh Rajpoot

मेरी आवाज़ – Poem By Prakam Singh Rajpoot

*मेरी आवाज़*
खुद की आवाज़ को बुलंद करके खुद को सुनाना चाहता हूँ।कितना बेसुरा या कितना सुरीला पता नहीं मुझे, मैं तो बस गाना चाहता हूँ।तालियों का मोह नहीं, बस कबीर की तरह निर्मोही रहना चाहता हूँ।खुद की आवाज़ को बुलंद करके खुद को सुनाना चाहता हूँ।बताना चाहता हूँ अपनी आवाज़ की ताकत लोगों कोप्यार, प्रतिरोध, आक्रोश सब कुछ अपनी आवाज़ से अभिव्यक्त करना चाहता हूँ।इस कोलाहल इस शोर को, आवाज़ में बदलना चाहता हूँ।भाग लेना चाहता हूँ, आवाज़ के दंगल में और जीतकर ज़ोर से चिल्लाना चाहता हूँ।अब बहुत रह लिया चुप अब तो बस खुद को सुनना चाहता हूँ।आवाज़ के रहते अब और नहीं रह सकता मूकखुद की आवाज़ को बुलंद करके खुद को सुनाना चाहता हूँ।